
बसपा सुप्रीमो मायावती दिल्ली विधानसभा में अपना जनाधार मजबूत करने के लिए तूफानी दौरे पर हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया।
मायावती ने शुरुआत दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद से की। वहीं, दोपहर बाद उन्होंने नजफगढ़ में कांग्रेस-भाजपा पर हल्ला बोला।
संबोधन में उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी व कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर कांग्रेस और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया।
मायावती ने कहा कि भ्रष्टाचार से पूरा देश परेशान है। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं। बगैर रिश्वत के छोटे-छोटे काम भी संभव नहीं होते।
इसका सबसे बुरा असर गरीब व मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। महंगाई से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह आजादी के बाद से अपनाई जाने वाली आर्थिक नीतियां हैं।
गरीबों की मदद के लिए चलाई जा रही सभी योजनाओं से न तो गरीबी घटी है और न ही बेरोजगारों की संख्या कम हुई है।
हमारी मांग ऐसी नीतियां बनाने की रही है जिससे देश में पूंजीपतियों का विकास होने की जगह आम लोगों का विकास हो, तभी जनता को गरीबी और दूसरी समस्या से मुक्ति मिलेगी।
हमने केंद्र सरकार को कई बार चिट्ठी लिखी है कि शिक्षा और नौकरियों में उच्च वर्ग के गरीबों के लिए अलग से आरक्षण दिया जाए, लेकिन हमारी बात को हमेशा दरकिनार किया गया।
भाषण में यूपी को दिया ज्यादा समय
उन्होंने अपनी सरकार की तुलना मौजूदा सपा सरकार से की। मायावती ने कहा कि सपा ने मतदाताओं को प्रलोभन देकर सत्ता हासिल की।
इसमें खास तौर से बेरोजगारी भत्ता और लैपटॉप वितरण का लालच था, लेकिन सरकार बनने के छह महीने के अंदर ही लोगों को लगने लगा है कि बसपा का शासन ही बेहतर था।
आलम यह है कि दो साल के भीतर सौ से ज्यादा दंगे हो चुके हैं। कानून-व्यवस्था की हालत बदतर है। गुंडे-बदमाश सड़कों पर घूम रहे हैं।
महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल है, लेकिन बसपा सरकार में गुंडे-बदमाश या तो यूपी से बाहर भाग गए थे या उन्हें जेल के अंदर भेज दिया गया था।
मायावती ने वादा किया अगर बसपा की सरकार बनती है कि यूपी की तर्ज पर दिल्ली का भी विकास होगा। सबसे अहम मुद्दा कानून-व्यवस्था होगी।
गरीब, पिछड़े, मजदूर, मुसलमान समेत सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के हित में नीतियां बनाकर समता मूलक समाज की स्थापना की जाएगी।
